बिल्डिंग रेगुलराइजेशन को मास्टर प्लान से नहीं जोड़े : डिप्टी मेयर

राजधानी में हजारों भवनों का नक्शा ही नहीं है. वहीं पुराने भवनों को भी रेगुलराइज करने को लेकर सरकार ने प्रस्ताव पारित कर दिया है. लेकिन इसमें कुछ बिंदुओं पर ध्यान देने की जरूरत है. इसलिए प्रस्ताव में कुछ संशोधन को लेकर सरकार का ध्यान आकृष्ट कराया गया है. ये बातें मंगलवार को डिप्टी मेयर संजीव विजवर्गीय ने कही. उन्होंने कहा कि भवन रेगुलराइजेशन का जो प्रस्ताव है उसे मास्टर प्लान से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. लोगों से एफिडेबिट के माध्यम से एक स्वेच्छा पत्र लेना चाहिए. शहर के विकास में भविष्य में अगर कोई बाधा आती है तो जिस अंश को विकास के लिए लिया जाना है उसे स्वेच्छा से संबंधित निकाय में देने का वादारूपी Affidavit लिया जाना चाहिए.

5 हजार स्क्वायर फीट तर्कसंगत नहीं

उन्होंने कहा कि भवन के क्षेत्रफल को 5 हजार स्क्वायर फीट और 15 मीटर हाइट में बंधन तर्कसंगत नहीं है. अगर हम व्यवहारिक दृष्टि से देखे तो 3 हजार स्क्वायर फीट का 4 भवन A , B , C , D भू-स्वामियों के द्वारा बनाया गया है. उसको हम रेगुलर कर रहे है तो चारों को एक साथ नियमित करने पर 12 हजार स्क्वायर फीट का भवन हो जाएगा. इसलिए केवल ऊंचाई सीमा को बांधना तर्कसंगत होगा.

अधिकारियों पर कार्रवाई सुनिश्चित हो

प्रस्ताव में है कि 2019 तक बने भवनों को ही रेगुलराइज किया जाएगा जो कि तार्किक नहीं है. उन्होंने कहा कि जिस दिन अधिसूचना जारी हुई है, उस दिन के पूर्व के बने हुए सभी भवनों पर ये नियम लागू होना चाहिए. उसके बाद अगर कोई निर्माण होता है तो संबंधित अधिकारियों पर भी कार्रवाई सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बिना अनुमति के कोई भवन कैसे बन गया.

50 परसेंट भूखंड सीएनटी में

उन्होंने कहा कि रांची शहर में सीएनटी (भूईहरि) वाली लगभग 50 प्रतिशत से अधिक भूमि है. इस भूमि पर मकान बनाकर लोग लंबे समय से रह रहे है. ऐसे घरों की संख्या 1 लाख से अधिक होगी. नगर निगम को उनके मालिकाना हक पर ना जाते हुए उन भवनों का भी उचित शुल्क लेकर रेगुलराइजेशन कर दिया जाना चाहिए. इसके अलावा उन्होंने कहा कि जहां कहीं भी सरकारी जमीन, नाला या रोड पर अतिक्रमण किया गया है उसे तत्काल मुक्त कराने की जरूरत है.

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