झारखण्ड : केंद्र व राज्य के संबंध के विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित.राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के प्रो उदय शंकर ने कहा कि अगर राज्यपाल राज्यहित में काम न कर रहे हों तो उन्हें हटाने का अधिकार राज्य के पास होना चाहिए.
रांची. झारखंड विधानसभा के सभागार में बुधवार को केंद्र व राज्य के संबंध के विषय पर राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित हुआ. इसमें हरायपुर के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के प्रो उदय शंकर ने कहा कि अगर राज्यपाल राज्यहित में काम न कर रहे हों तो उन्हें हटाने का अधिकार राज्य के पास होना चाहिए. प्रो उदय शंकर ने कहा कि अगर ऐसी परिस्थिति हो तो विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर उसे राष्ट्रपति के पास भेजने का अधिकार विधानसभा के पास होना चाहिए.

हालांकि इसकी भी एक तय गाइडलाइन होनी चाहिए ताकि राज्यपाल विधानसभा की कठपुतली बनकर न रह जाए. प्रो उदय शंकर ने कहा कि हमेशा यह बात सामने आती रही है कि राज्यपाल की नियुक्ति और उन्हें हटाने में राज्य की भी भूमिका होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि देशों में संघ और राज्य होल्डिंग टुगेदर और कमिंग टुगेदर दो सिस्टम के तहत काम करते हैं. कमिंग टुगेदर यूएस मॉडल है जबकि भारत में होल्डिंग टुगेदर सिस्टम में केंद्र और राज्य जुड़े हैं.
भारत के संविधान में संघीय ढांचे में केंद्र को ज्यादा पावर मिला है. केंद्र अपने प्रतिनिधि के रूप में राज्यपाल की नियुक्ति करते हैं. जब केंद्र और राज्य में अलग अलग दलों की सरकार होती है तो कई बार केंद्र और राज्य में विवाद देखने को मिलता है. राज्यपाल पर केंद्र के एजेंट के रूप में काम करने का आरोप लगता है. ऐसे में जरुरी है कि राज्यपाल की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए.