
पूर्व विधायक बहादुर उरांव का सरकार के नाम खुला पत्र
रांची.
चक्रधरपुर के पूर्व विधायक बहादुर उरांव अब काफी वृद्ध हो चुके हैं. मगर अभी भी राजनीति में पैनी नजर रखते हैं. राजनीति के साथ साथ सामाजिक सरोकारों के प्रति भी उनकी चिंता झलकती है. वे पिछले दिनों रांची में थे. राजनीति और वर्तमान हालात को लेकर केंद्र सरकार, राज्य सरकार व प्रशासन के नाम खुला पत्र जारी किया है. इस पत्र में उन्होंने सत्ता के अपराधीकरण सहित कई मुद्दों को उठाया है.
बहादुर उरांव ने कहा है कि सत्ता का अपराधियों से मुक्त होना बहुत जरूरी है. उन्होंने भाजपा सांसद ब्रजभूषण सिंह व झारखंड के कई राजनीतिज्ञों का उदाहरण देते हुए कहा कि हर पार्टियों को अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ेगी. चुनाव आयोग को भी पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन के विचारों को अपनाना पडेगा. राजनीतिक पार्टियां अपराधियों को टिकट देती और वे मंत्री भी बनते हैं. उन्होंने कहा कि पार्टियां असामाजिक तत्वों को टिकट देना बंद करें.
उन्होंने कहा कि उद्योंगों और विकास के नाम पर आदिवासियों को हमेशा छला जाता रहा है. बिरसा मुंडा के उलगुलान के बाद सीएनटी, एसपीटी एक्ट बना, डॉ भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में संविधान बना. देश में एक धर्म के नाम पर संविधान को खत्म करने की साजिश चल रही है. विकास के नाम पर आदिवासियों मूलवासियों की जमीन ली जा रही हैं और उन्हें विस्थापित किया जा रहा है.
बहादुर उऱांव ने सभी नागरिकों से जुड़े सामाजिक सरोकार का मुद्दा भी उठाया कहा कि कचड़ा प्लांट के नाम पर गांवों को प्रदूषित किया जा रहा है. शहरों में मकान बनाने से पहले नक्शा बनाने का प्रावधान है पर घूस देकर नक्शा पास कराया जाता है और नियमों को धज्जियां उड़ाई जाती है.
चक्रधरपुर में उपायुक्त कार्यालय का निर्माण हुआ है और वह धंस भी रहा है. बाहदुर उरांव ने कहा कि इस मामले की यथाशीघ्र जांच किया जाना चाहिए.
उहोंने कहा कि शराबबंदी से संबंधित गुरूजी के विचारों का सम्मान किया जाना चाहिए और शराबबंदी लागू करना चाहिए.