
गुमला, गिरिडीह दुमका, साहिबगंज, पाकुड़ व में निबंधित मजदूरों की संख्या सर्वाधिक
रांची।
राज्य में रोजगार के अवसरों की कमी की वजह से यहां के श्रमिक दूसरे राज्यों में काम की तलाश के लिए जाने पर मजबूर है। हर साल लाखों की संख्या में झारखंड के श्रमिक काम की तलाश में बंगाल, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड आदि में जाने पर मजबूर है। राज्य सरकार दावा तो करती है कि स्थानीय स्तर पर ही ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र बनाया जायेगा कि राज्य के लोगों को बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी पर यह दावा अभी तक महज बयानो और कागजों तक ही सीमित है।
श्रमाधान पोर्टल के आंकड़े बताते हैं कि दुमका, गुमला, साहिबगंज, पाकुड़, गिरिडीह ऐसे जिलें हैं, जहां से सबसे प्रवासी मजदूर अन्य राज्यों का रूख करते हैं। वहीं, जामताड़ा, खूंटी, लोहरदगा और खरसावां से बाहर जाने वालों की संख्या अपेक्षाकृत कम है।
झारखंड में गिरिडीह ऐसा जिला है, जहां से सबसे ज्यादा मजदूर प्रवासी रूप में दूसरे राज्यों में काम कर रहे हैं। इनकी संख्या 19103 है।
झारखंड सरकार के श्रमाधान पोर्टल में अभी तक 1,67,692 पंजीकृत मजदूर ऐसे हैं जो रजिस्टर्ड होकर दूसरे राज्यों में काम करने गए हैं। हालांकि यह भी है कि इससे कई गुना लोग ऐसे हैं जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं है और वे दूसरे राज्यों में काम करने गए हैं।
गुजरात, उत्तराखंड, पंजाब, बिहार, महाराष्ट्र, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, केरल, तमिलनाडु, अंडमान-निकोबार, लद्दाख, लक्षद्वीप, ओड़िशा, हरियाणा, यूपी, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्य।
किस जिला से कितने प्रवासी श्रमिकों ने कराया निबंधन
गिरिडीह-19103, दुमका-11637, पूर्वी सिंहभूम-1660, जामताड़ा-115, खूंटी-996, लातेहार-2784, गुमला-11528, धनबाद-2496, सिमडेगा-5565, साहिबगंज-11493, रांची-1614, रामगढ़-1280, देवघर-1514, सरायेकला-खरसावां-729, बोकारो-8210,चतरा-1271, गोड्डा-12485, पश्चिमी सिंहभूम-11721, हजारीबाग-8575, गढ़वा-6667, पाकुड़-12499, लोहरदगा-664, पलामू-7210, कोडरमा-605