डॉ रामदयाल मुंडा की बारहवीं पुण्यतिथि पर दी गई श्रद्धांजलि

रांची .
रांची विश्वविद्यालय के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा संकाय में पद्मश्री डॉ रामदयाल मुण्डा की बारहवीं पुण्यतिथि मनायी गयी. विभाग के प्राध्यापकों, शोधकर्ताओं एवं छात्रों ने डॉ मुण्डा के तस्वीर पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. संचालन प्राध्यापक डॉ किशोर सुरिन ने जबकि धन्यवाद प्राध्यापक करम सिंह मुण्डा ने किया.
अध्यक्षता करते हुए मुण्डारी विभाग के विभागाध्यक्ष मनय मुण्डा ने कहा कि डॉ रामदयाल मुण्डा विश्व मानव थे. वे किसी जाति, धर्म, समुदाय के बारे में नहीं बल्कि पूरे झारखंड की कल्याण की बात करते थे. वे सबों को साथ लेकर चलते थे. कहा कि डॉ राम दयाल मुण्डा ने झारखंड की जो परिकल्पना की थी आज उनकी वह परिकल्पना साकार रूप ले रही है. उन्होंने कहा कि डॉ मुण्डा जी की परिकल्पना थी कि झारखंड के प्रत्येक शिक्षण संस्थान में एक अखड़ा हो, जिससे यहाँ के युवा पीढ़ी का अपनी संस्कृति से जुड़ाव हो. ताकि हम अपने सभ्यता व संस्कृति को बरकरार रख सकें.
विषय प्रवेश कराते हुए प्राध्यापक डॉ उमेश नन्द तिवारी ने एक छात्र के रूप अपने गुरु डॉ मुण्डा के सानिध्य में बिताये पलों को साझा करते हुए कहा कि वे एक बेहतरीन शिक्षक थे. वे पूरे झारखंड को एक सूत्र में बांधने का काम किया. समन्वय की संस्कृति को प्रगाढ़ किया. क्योंकि संस्कृति हमें एक दूसरे से जोड़ती है इस बात को डॉ मुण्डा ने बताया. उन्होंने कहा कि बहुमुखी प्रतिभा के धनी पद्मश्री डॉ रामदयाल मुण्डा जैसे महान व्यक्ति का सानिध्य मिलना सौभाग्य की बात है. वे विराट व्यक्तित्व के धनी व्यक्ति थे.
इस मौके पर प्राध्यापक सविता केशरी, डॉ गीता कुमारी सिंह, डॉ बीरेन्द्र कुमार महतो, डॉ रीझू नायक, डॉ दमयन्ती सिंकू, डॉ सरस्वती गागराई, तारकेश्वर सिंह मुण्डा, डॉ अनुराधा मुण्डू, डॉ नकुल कुमार, प्रेम मुर्मू, शकुन्तला बेसरा, विजय आनन्द, डॉ हेमलाल कुमार मेहता के अलावा अन्य सहायक प्राध्यापक, शोधार्थी एवं छात्र छात्राएँ मौजूद थे.