देश को यूसीसी की जरूरत नहीं, भाजपा उठा रही गैरजरूरी मुद्दे : देवकुमार धान

देश को यूसीसी की जरूरत नहीं, भाजपा उठा रही गैरजरूरी मुद्दे : देवकुमार धान

यूसीसी के खिलाफ आदिवासी समन्वय समिति का दिल्ली में धरना 6 अक्तूबर को

रांची:

यूसीसी (समान नागरिक संहिता) के विरोध में देश के कई हिस्सों में आवाज मुखर हो रहा है. आदिवासी संगठन, मुसलिम संगठन व कई अन्य समुदायों ने यूसीसी का विरोध करना शुरू कर दिया है। देशभर के अदिवासी संगठनों के द्वारा 6 अक्तूबर को दिल्ली में धरना आयोजित होगा. धरना के जरिए केंद्र सरकार को यूसीसी लागू नहीं करने का आह्वान किया जायेगा। उससे पूर्व 24 सितंबर को पटना में बैठक होगी. 29 सितंबर को कोलकाता में रैली निकाली जायेगी और एक अक्तूबर को अहमदाबाद में बैठक होगी.

यह जानकारी विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि देवकुमार धान, गीताश्री उरांव, प्रेमशाही मुंडा व नारायण उरांव ने शुक््रवार को संवाददाता सम्मेलन में दी.

आदिवासी समन्वय समिति के देव कुमार धान ने कहा की समान नागरिक संहिता की जरूरत ही नहीं है . देश को इस समय जरूरत है शिक्षा की,  स्वास्थ्य की पर इन मुद्दों को छोड़ केंद्र सरकार बेकार की चीजें ला रही है.उन्होंने कहा कि हमें यूसीसी नहीं चाहिए.

अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद की प्रदेश अध्यक्ष  गीताश्री  उरांव ने कहा कि 2014 से ही यूसीसी  भाजपा के एजेंडा में शामिल है. समान नागरिक संहिता अव्याहारिक है और गैरजरूरी  है. हमारा विविधताओं का देश है. यूसीसी  से सिर्फ आदिवासियों को ही नहीं बल्कि मुसलिम और कई  अन्य समुदायों को भी आपत्ति है. इससे देश की विविधता पर आघात होगा.

आदिवासी जनपरिषद के प्रेमशाही मुंडा ने कहा कि देश में यूसीसी के खिलाफ माहौल बन रहा है. उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ जोरदार आंदोलन होगा.

संवाददाता सम्मेलन में कहा गया कि देशभर में 730 अनुसूचित जनजातियां है और इनकी कुल जनसंख्या 10.4 करोड़ है.  इन सभी जनजातियों की अपनी विशिष्ट भाषा और संस्कृति है. यूसीसी से जनजातियों की विशिष्टता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा.

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