हज हाउस कडरू में अमन व इंसाफ कांफ्रेंस

रांची :
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर आज हज हाउस कडरू में अमन व शांति कांफ्रेंस का आयोजन हुआ। इसमें हिंदू, मुसलिम, सिख, ईसाई व सरना धर्मों के प्रतिनिधियों के अलावा सैकड़ों की संख्या में आम नागरिक शामिल हुए। कांफ्रेंस में देश के वर्तमान हालात पर चर्चा की गई। संविधान की प्रस्तावना का पाठ हुआ और इस भी विमर्श किया गया कि कैसे देश में सौहार्द का माहौल कायम हो।
इस अवसर पर प्रख्यात अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने महात्मा गांधी से सीख लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि बिना नैतिक मूल्यों के बेहतर समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। स्कूली कोर्स में नैतिकता की पढ़ाई जरूरी है। दिल्ली से आए वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत टंडन ने कहा कि व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी से दीक्षित लोग अब सदन में पहुंवच गए हैं। उनका इशारा भाजपा सांसद रमेश बिधूड़ी की ओर था। कहा कि अब तक इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
सिख पंथ के विक्रमजीत सिंह ने कहा कि कोई भी धर्म अमन व शांति की बात ही सिखाता है। गुरू ग्रंथ भी यहीं सिखाते हैं किसी को नीचा और खुद को ऊंचा नहीं समझना चाहिए। हमें नेगेटिव बातों को छोड़ अमन और शांति को बढ़ावा देना चाहिए।
पटना के फुलवारी शऱीफ से आए मौलाना शिबली काजमी इस कांफ्रेंस के जरिए मोहब्बत व इंसाफ बुलंद करने की कोशिश है जिसमें सभी धर्म के लोग शामिल हैं। यह सिलसिला जारी रहना चाहिए क्योंकि हर कोई अमन से ही रहना चाहता है।
सामाजिक कार्यकर्ता बलराम ने लोगों को संविधान की प्रस्तावना का पाठ पढाया। इसे बाद उन्होंने कहा कि देश संविधान से चले यहीं सियासत है। सियासत वह नहीं है जो सिर्फ कुछ दल करते हैं। इसमें देश के हर नागरिक की सकारात्मक भूमिका होनी चाहिए। दुर्भाग्य है कि आज कुछ लोग संविधान को ही बदलने की बात कर रहे हैं।
ज्योति सिंह माथरू ने कहा कि आज सदभावना को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। हम कोशिश करें कि एक दूसरें को सम्मान दें। यदि हम किसी का सम्मान करेंगे तभी अगला भी हमारा सम्मान करेगा। सिख गुरू ने कहा था कि मानव की जात एक है। इसका अर्थ है कि सभी इंसान बराबर हैं।
ईसाई धर्म के प्रतिनिधि के रूप में रतन तिर्की ने कहा कि आज देश में जो नफरत का माहौल है उसे सब देख रहे हैं। आखिर आज ऐसा क्या हो गया है कि देश में अमन व शांति बहाल करने की कोशिश की बात हो रही है। कैसे कुछ लोगों की वजह से पूरे धर्म विशेष के लोगों को नफरत का शिकार बनाया जा रहा है। मुझे लगता है कि देश बंटा नहीं है, बांटा गया है। पर हम सभी को इसके खिलाफ खड़े होने की जरूरत है।
कांफ्रेंस को मौलाना अलमद वली रहमानी, मौलाना महमूद मदनी, मौलाना सआदुल्लाह हुसैन, मौलाना असगर अली इमाम मेंहदी, रियाज शरीफ, प्रो जेएल उरांव, बौद्ध भतें जनेंद्र ने सहित अन्य ने भी संबोधित किया।