नीले आसमान के लिए जागरूकता एवं साझा पहल आवश्यक

 

Awareness and joint initiative necessary for blue sky

रांची.

इंटरनेशनल डे ऑफ क्लीन एयर फॉर ब्लू स्काइज (नीले आसमान के लिए स्वच्छ वायु का अंतर्राष्ट्रीय दिवस) के अवसर पर झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (जेएसपीसीबी) और सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) द्वारा संयुक्त रूप से एक राज्य-स्तरीय कार्यशाला ‘टुगेदर फॉर क्लीन एयर’ का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वायु गुणवत्ता के विषय पर वैज्ञानिक समाधान के अनुरूप सामूहिक प्रयासों को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री ए.के. सिंह (आईएएस), विकास आयुक्त एवं अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग, झारखंड ने कहा कि ‘स्वच्छ हवा एवं स्वस्थ पर्यावरण सततशील विकास का आधारस्तम्भ है। हमें मिशन-संचालित दृष्टिकोण के साथ अपने प्रयासों को विकास लक्ष्यों और जलवायु समाधानों के साथ सम्मिलित करना होगा, जिससे स्वच्छ हवा और नीले आसमान को हासिल करने में मदद मिलेगी।’

ज्ञात हो कि वायु प्रदूषण हमारे समय की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2019 में इंटरनेशनल डे ऑफ क्लीन एयर फॉर ब्लू स्काइज के लिए एक प्रस्ताव अपनाया। इस वर्ष की थीम ‘टुगेदर फॉर क्लीन एयर’ है।

इस अवसर पर क्लाइमेट गवर्नेंस और स्टेकहोल्डर्स के बीच कन्वर्जेन्स पर जोर देते हुए डॉ. संजय श्रीवास्तव (आईएफएस), प्रधान मुख्य वन संरक्षक और वन बल प्रमुख, वन, झारखंड ने कहा कि वन विभाग की ओर से जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए बेस्ट प्रैक्टिसेज, सक्सेस स्टोरी का ठोस क्रियान्वयन किया जा रहा है। पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए समुदाय आधारित बॉटम-अप प्लानिंग एवं क्रियान्वयन की महत्वपूर्ण भूमिका है। कार्यक्रम के दौरान डॉ. डी.के. सक्सेना (आईएफएस), एपीसीसीएफ सह अध्यक्ष, एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग कमिटी, झारखंड ने कहा कि स्वच्छ वायु के लिए विज्ञान-आधारित, समाधान-केंद्रित उपायों को लागू करने में आम नागरिकों की सहभागिता अनिवार्य है। श्री एन.के. सिंह (आईएफएस), एपीसीसीएफ (डेवलपमेंट) ने एक सामूहिक अभियान की भावना पर जोर दिया और कहा कि जनस्वास्थ्य एवं पर्यावरण के पारस्परिक संबंधों को प्राथमिकता देते हुए समुदायों को सशक्त करना चाहिए।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन के उपायों के बारे में श्री वाई.के. दास (आईएफएस), सदस्य-सचिव, जेएसपीसीबी ने कहा कि ‘राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत राज्य के नौ शहरों के लिए स्वच्छ वायु कार्य योजना के निर्माण और कार्यान्वयन के लिए हम प्रतिबद्ध है। जेएसपीसीबी स्वच्छ वायु गुणवत्ता के लिए वैज्ञानिक अध्ययन, बेस्ट प्रैक्टिसेज का अनुपालन, ग्रिवान्स रेड्रेसल पोर्टल एवं लोगों को इस मुहिम से सक्रियता से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयत्नशील है।’

कार्यक्रम में शहरी स्थानीय निकायों, धनबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमिटी सहित अन्य एजेंसियों के वायु प्रदूषण नियंत्रण के उल्लेखनीय कार्यों पर खास तौर पर सराहा गया। इसके अतिरिक्त गत सप्ताह से जारी अभियान के दौरान हुई रचनात्मक गतिविधियों के लिए शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों को पुरस्कृत किया गया।

इस अवसर पर डॉ. मनीष कुमार (डायरेक्टर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, सीड) ने प्रभावी वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए विज्ञान-आधारित योजना और डाटा गवर्नेंस के आधार पर परिणामोन्मुखी प्लान तैयार करने पर जोर दिया। डॉ. अत्री गंगोपाध्याय (पल्मोनोलॉजिस्ट) ने वायु प्रदूषण से जुड़े जान स्वास्थ्य की समस्यायों पर रौशनी डालते हुए हेल्थ इम्पैक्ट स्टडी करने और जन-जागरूकता फ़ैलाने पर जोर दिया। श्री पीसी झा (सीएमपीडीआई), श्री सोमेन बिस्वास (बोकारो थर्मल) आदि ने इंडस्ट्रियल पॉल्युशन रोकने से संबंधित पहल और तकनीकों पर बात रखी।

कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में कई प्रमुख सुझाव जैसे, प्रदूषण हॉटस्पॉट की पहचान, प्रदूषण स्रोतों के लिए स्थानीय समाधान, उच्च प्रदूषण वाले दिनों के लिए पब्लिक एजुकेशन रणनीतियाँ और लोगों की शिकायतों के समाधान के लिए यूजर फ्रेंडली ऐप्स एवं पोर्टल का विकास आदि को प्रस्तुत किया गया।

इस कार्यक्रम में कॉर्पोरेट कंपनियों  टाटा स्टील, टाटा पावर,, अडानी इंडस्ट्रीज, सार्वजनिक उपक्रमों, सेल, सीसीएल, सहित प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों, रांची यूनिवर्सिटी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ झारखण्ड, एमिटी यूनिवर्सिटी, सिविल सोसाइटी संगठनों, नागरिक समूहों और छात्र-छात्रों की सहभागिता रही।

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