मध्यकालीन यूरोप की सीक्रेट सोसायटी नाइट टेंपलार
कैसे अंत हुआ इस सीक्रेट सोसाइटी का

प्रवीण
रांची।
अभी हाल ही में कुछ वर्ष पूर्व पौलेंड के ग्रामीण इलाके में 12 वी सदी में बनी लाल ईटों वाली एक चर्च में कुछ पुरात्वविदों ने कुछ खास खोजा। यहां कुछ कब्रें मिली और उस दौर के इंसानी कंकाल भी। यह चर्च पश्चिम पौलेंड के चवास्जर्नी नामक जगह में सेंट स्टेनिस्लास के चैपल के नाम से जाना जाता था। यह चर्च सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं था बल्कि एक टेंपलार आउटपोस्ट (चौकी) थी। फ्रांस से निकाले जाने के बाद नाइट टेंपलार यहां फिर से एकत्र होने लगे थें और खुद को संगठित करने में लगे थें। उनका एक समूह इंग्लैंड की ओर निकल गया था ऐसे ही कई और समूह यूरोप के अलग अलग हिस्सों में फैल गए। धीरे धीरे वे इतिहास में कहीं खो गए। कौन थे ये नाइट टेंपलार ? ये कैसे अस्तित्व में आए? और ये कैसे गुम हो गए ?
मध्यकालीन यूरोप में एक दौर ऐसा आया जब वह फिर से अराजकता और अंधकार के युग में प्रवेश कर रहा था। लुटेरों और डाकुओं की वजह से उस समय यात्राएं करना अपनी जान को दांव पर लगाने जैसा था। यूरोप से ईसाइयों और यहूदियों की पवित्र भूमि जेरूसलेम की यात्रा करने वाले यात्रियों को लूट लिया जाता था और उनकी हत्याएं कर दी जाती थी। तब धार्मिक यात्रा करनेवाले दलों की रक्षा के लिए एक सीक्रेट संगठन अस्तित्व में आया। इन्हें नाइट टेंपलार कहा जाता था। यह संगठन ईसाइयों के सर्वोच्च धर्मगुरू पोप की सहमति से बना था। नाइट टेंपलार ईसाई योद्धाओं का एक संगठन था जो भिक्षुओं के वेश में उन यात्रियों के साथ चलता था जो जेरूसलेम की पवित्र भूमि के दर्शन करना चाहते थें।
सफेद गाउन और रेड क्रॉस वाले योद्धाओं का समूह

नाईट टेंपलार का गठन 1119 में हुआ था। इसमें कई हजार योद्धा थें जो सफेद रंग के गाउन के ऊपर लाल रंग के कॉंस वाली ड्रेस पहनते थें। यह संगठन, इंग्लैंड, फ्रांस, पोलैंड से लेकर पश्चिम एशिया के जेरूशलेम तक फैला था। जल्दी ही यह संगठन यूरोप से लेकर एशिया तक एक धनी और शक्तिशाली संगठन के रूप में ऊभरा। यूरोप भर में इसके अपनी चौकियां थी। धीरे धीरे इस संगठन के पास अथाह पैसा हो गया। अपने चरम पर यह संगठन एक बैंकिंग प्रणाली का भी काम करने लगा था। अगर यूरोप के किसी व्यक्ति को पैसा किसी दूरस्थ स्थान पर पैसा भेजना होता था तो वह अपने साथ धन लेकर नहीं जाता था। बल्कि वह नाइट टेंपलार के पास स्थानीय चौकी में पहुंचता था। नाईट टेंपलार को भेजनेवाली राशि सौंपकर उससे उतनी राशि की पर्ची ले लेता था। वह पर्ची गंतव्य पर नाइट टेंपलार की चौकी में देकर उतनी ही राशि प्राप्तकर्ता को मिल जाती थी। जाहिर है यह काम टेंपलार मुफ्त में तो नहीं करते थें. वे इसके एवज में राशि वसूलते थे और यह उनकी आमदनी के कई स्रोतों में से एक था।
ष़डयंत्र और संगठन का पतन
यूरोप में कई सामंतों और राजाओं को नाइट टेंपलार खटकने लगे थें। इस संगठन की शक्ति और धन से उन्हें वे अपने लिए खतरा लगने लगा था। इसके बाद नाइट टेंपलार के बारे में दुष्प्रचार किया जाने लगा। कहा जाने लगा कि ईसाइयत की बुराई करते हैं। धर्मग्रंथों का मजाक उड़ाते हैं। इसके बाद बाकायदा नाइट टेंपलार के खिलाफ आरोपों की एक लंबी फेहरिस्त तैयार की गयी। इन आरोपों को पोप औप फ्रांस के राजा फिलिप के समक्ष प्रस्तुत किया गया। राजा फिलिप को मौके की तलाश थी। उसने नाइट टेंपलार के संगठन को भंग करने का आदेश दिया। संगठन को भंग कर दिया गया। बड़ी संख्या में नाइट टेंपलार को गिरफ्तार कर लिया गया। हत्याएं हुई। कई टेंपलार को जिंदा जला दिया गया। इसी के साथ नाइट टेंपलार इतिहास के स्याह पन्ने में गुम हो गए। पर आज भी उनकी कहानियां और उनके मठों के अवशेष उनकी बहादुरी की कहानियों को जिंदा कर देती है।