देश में और जेलों के निर्माण की जरूरत क्या है यह कैसा विकास है? हम आगे जा रहे हैं या या पीछे की ओर? राष्ट्रपति ने उठाया सवाल.
RANCHI : बीते दिनों न्यायाधीशों और कानून मंत्री की उपस्थिति में आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपति माननीय द्रौपदी मुर्मू ने जेलों में बंद कैदियों और उनके हालात पर सवाल उठाया था. उनका सवाल यह था कि वे कौन लोग हैं जो जेलों में बंद हैं? उन्होंने क्या गुनाह किया था?

उन्होंने खासकर ओडिशा और झारखंड की जेलों के संदर्भ में यह पूछा था लेकिन उनका आशय पूरे देश में जेलों की स्थिति के बारे में था. इन दो पिछड़े राज्यों में ज्यादातर बंदी आदिवासी या फिर अन्य पिछड़े या दलित वर्ग से हैं. सुदूर जंगली क्षेत्रों में बसे गांवों के ऐसे लोग जो मुर्गी चोरी, थप्पड़ मारने या मामूली झगड़े में दस साल, बीस और कुछ तो 25 और 30 सालों से जेल में बंद हैं.
ऐसे लोग, जिनके पास जीवन जीने के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. जो अशिक्षित हैं, जिन्हे संवैधानिक अधिकारों की जानकारी नहीं है. ऐसे लोगों से जेल भरे हुए हैं. बेशक इसमें कुछ ऐसे लोग भी होंगे जिन्होंने जघन्य अपराध भी किया होगा.
कुछ लोग हत्या करके भी आजाद घूमते हैं और कुछ मामूली अपराधों में जेलों में बंद
कानून की विषमता पर सवाल उठाते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि कुछ लोग हत्या जैसे जघन्य अपराध करने के बाद भी बाहर खुले में आजाद घूमते हैं वहीं मामूली और छोटे-छोटे अपराधों में आदिवासी और अन्य पिछड़े वर्ग के लोग जेलों में अपनी जिंदगी खत्म कर देते हैं. लोग उन्हें छुड़ाने में दिलचस्पी नहीं लेते ताकि उनकी जमीन और संपत्तियों पर कब्जा किया जा सके. राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे लोगों के लिए आप लोगों को सोचना होगा और कुछ करना भी होगा.
इसी कार्यक्रम में राष्ट्रपति का एक और बात की ओर भी इशारा किया. उन्होंने कहा कि जेल ओवरक्राउडेड होते जा रहे हैं और इसलिए अब और अधिक जेलों के निर्माण की बात की जा रही है. पर इनमें जो खर्च होगा वह सरकार पर बोझ की तरह है.
कुछ बातों को नहीं कह रही पर आपलोगों को उसे भी समझना होगा
राष्ट्रपति ने कहा कि यह कैसा विकास है? हम आगे जा रहे हैं या फिर पीछे जा रहे हैं? जेलों का निर्माण क्यों होना चाहिए? उन्होंने कहा कि मैं इन बातों को आपलोगों के समक्ष रख रही हूं और कुछ बातों को नहीं कह रही हूं पर आपलोगों को उनको भी समझना होगा.
झारखंड में एक दिन में पांच हजार मामले खत्म किए गए
राष्ट्रपति ने झारखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां झालसा की पहल पर एक दिन में पांच हजार से अधिक मामले खत्म किए गये.
राष्ट्रपति ने जो सवाल उठायें वो एक गंभीर मुद्दा है और देश की हालात की ओर साथ ही तथाकथित विकास की अवधारणा पर प्रहार करता है. उम्मीद कर सकते हैं कि राष्ट्र की प्रथम नागरिक के द्वारा उठाये गए इन सवालों पर सक्षम लोग और संस्थाएं विचार करेंगी.