
झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पैनल डिस्कशन का पलाश बैंक्वेट वन भवन में आयोजन किया गया. जिसका विषय था फ्यूचर रेडी झारखंड Only One Jharkhand. एक्सपर्ट्स ने कहा कि झारखण्ड का आदिकाल से जंगलों से अद्वितीय रिश्ता है. भगवान बिरसा मुंडा की इस ऐतिहासिक भूमि की सीमा में छोटानागपुर का पठार और संताल परगना की पहाड़ियां शामिल है. औद्योगिक विकास के कारण जंगलों का क्षेत्रफल हर दिन घट रहा है. विषम परिस्थिति से निपटने को बोर्ड ने कदम उठाएं हैं. साथ ही औद्योगिक उत्सर्जन को कम करने और दुनिया भर में मान्य और प्रचलित निगरानी व नियामक को यहां भी सुनिश्चित किया है. गुजरात और महाराष्ट्र के बाद, झारखंड देश में तीसरा राज्य है, जिसने औद्योगिक प्रदूषण के आंकड़े जानने का अधिकार नागरिकों को दिया है. ये आंकड़े वेबसाईट पर लाइव उपलब्ध होते हैं.
प्राकृतिक संपदा की रक्षा जरूरी
एक्सपर्ट्स ने कहा कि राष्ट्रीय प्रदूषण नियंत्रण दिवस 2 दिसम्बर पर प्रदूषण नियंत्रण के प्रति जागरुकता को लेकर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए. इस विषय के विशेषज्ञों, कॉर्पोरेट लीडरों, स्टूडेंट्स और पत्रकारों को एक ही मंच पर आमंत्रित किया. प्रदूषण से बचाव और भविष्य में होने वाली समस्याओं से निजात पाने के उपाय को लेकर चर्चा हुई. कहा गया कि हमारे पास रहने के लिए एक ही पृथ्वी है. लंबे समय तक जीने के लिए सीमित प्राकृतिक संपदा की रक्षा जरूरी है. झारखण्ड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मेंबर सेक्रेटरी वाईके दास ने कहा कि जीवन की समृद्धि के लिए प्रकृति की हवा, जल, पेड़-पौधे, इंधन और ऊर्जा महत्त्वपूर्ण हैं.
पैनल डिस्कशन में ये रहे मौजूद
डॉ भूपेश कुमार, प्राचार्य, इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट रांची, डॉ प्रकाश चन्द्र दास, असिस्टेंट प्रोफ़ेसर XISS रांची, डॉ राणा एस चक्रवर्ती निदेशक, (Marketing & Production), एचइसी रांची, डॉ वीवीएसएन पिनाकपाणी वरिष्ठ मुख प्रबंधक पर्यावरण मेकन, खूशबू कटारुका मोदी अध्यक्ष पर्यावरण और प्रदूषण उप समिति फेडरेशन ऑफ झारखण्ड